कोविड-१९ महामारीको बेलामा आफ्नो हेरचाह कसरी गर्ने भन्ने बारे सचेतनात्मक रेडियो सन्देश!

प्रदेश-१, प्रदेश-२, बाग्मती, गण्डकि , लुम्बिनी र कर्णालि प्रदेशको सदरमुकाम र आस पासका जिल्लामा बसोबास गरिरहेका अपाङ्गता भएका व्यक्ति, तिनका परिवार र समुदायमा रहेका आम-व्यक्तिलाई कोविड-१९ को बेलामा आफ्नो हेरचाह कसरी गर्ने र खोप सम्बन्धि सचेतना अभिबृद्धि गर्न कोविड-१९ सम्बन्धि विद्द्यमान सुचनालाई लक्षित समुहमा पहुँच्युक्त र सजिलो माध्यमबाट उप्लब्ध गराउन सीबिएमसंगको साझेदारीमा नेपाल सरकार स्वास्थ्य तथा जनसन्ख्या मन्त्रालय, राष्ट्रिय स्वास्थ्य शिक्षा, सूचना तथा संचार केन्द्र एवं राष्ट्रिय अपाङ्ग महासंघ नेपाल द्वारा जनहितमा जारी ।

PSA covid and disability with government stampPSA covid and disability with government stamp

(घर बाहिरको वातावरण, घरको भर्याङमा मानिस हिँडेको आवाज, विस्तारै ढोका खुलेको आवाज)

मुनाः दिदि नमस्कार ।  तपाईंलाई कस्तो छ अहिले ?

कान्छी दिदि:  नमस्कार बहिनी ।  ओ हो ! ल आउ आउ ! उ त्यो मेरो ह्वीलचियर अलि परतिर सारेर मेच,  तानेर बस ।  अहिले त ठिक छु  ।  तर यो कोरोनाले मलाइ त अलि गाह्रो पार्यो । जिउ दुख्ने र खोकिले त हैरानै बनायो । जोरो वेस्सरी आउने रैछ, साँस फेर्न गाह्रो हुने  ….खै ! के के हो के के ?

मुनाः हो र ! अनि यस्तोबेला आफ्नो हेरचाह कसरी गर्नुभयो त ! धन्न तपाइँको शौचालयमा ह्विलचियर सजिलै जाने भएर मद्दत गर्यो होला है दिदी !

कान्छी दिदी:  हो नि!  अरुबाट छुट्टै बस्नुपर्ने  यो बेलामा त सजिलो संरचनाको महत्तव झन् बढी हुने रहेछ ।

मुना – है  ।

कान्छी दिदि: अनि म त घरमै बसें । अस्पताल जानु चाहिँ परेन ।  हावा ओहर दोहर हुने छुट्टै कोठामा बसें । छोरीले बेला बेलामा ज्वरो र अक्सिजनको मात्रा नापिदिन्थी ।  अनि केहि सल्लाह लिनु परे १११५ मा फोन गरेर लिन्थि । ९८५१२५५८३७ मा पनि एस एम एस गरि परामर्श लिन सकिन्छ रे । मलाई स्याहार गर्दा छोरीले राम्रो संग मास्क लगाउने र बेला बेलामा मिची मिची साबुन पानि हात धुन्थी ।

मुना: ओ हो!  छोरीले त निकै राम्रो काम गरिछिन्

 कान्छी दिदि:  हो नी सास फेर्न धेरै गार्हो भएमा, छाती धेरै दुखेमा वा हिड्न बोल्न वा अन्योल महसुस भएमा चाहिँ अस्पताल लैजानु पर्ने रहेछ ।

मुना: ए  कोरोनालाई जित्न धेरै कुरामा पो ख्याल गर्नुपर्ने रैछ त ।

कान्छी  दिदी:  हो नी । अनि थाहा छ कहिलेकाहिँ अल्छि लाग्दा छोरीले अर्को कोठामा गीत  बजाउँथी म चाहिँ यता सुन्दै रमाउँथे । हेहेहेहे दुवैजना हाँस्छन् ।

मुना:  लौ त दिदी तपाईको अनुभवबाट मैले पनि धेरै कुरा सिकेँ । संरचनाहरू त अझ सबैखाले अपाङ्गता भएका व्यक्ति, ज्येष्ठ नागरिक, बालबालिका, गर्भवति महिला सबैलाइ सोचेर बनाउनुपर्छ । हेर्नु त ! मान्छेलाइ आफ्नो हेरचाह आफै गर्न कति सजिलो हुने !

सीबिएमसंगको साझेदारीमा नेपाल सरकार स्वास्थ्य तथा जनसन्ख्या मन्त्रालय, राष्ट्रिय स्वास्थ्य शिक्षा, सूचना तथा संचार केन्द्र एवं राष्ट्रिय अपाङ्ग महासंघ नेपाल द्वारा जनहितमा जारी  ।

मैथिली भाषामा:

महिला ःनमस्कार भैया कि समाचार अई आहाके
पुरुष ःखुश रह बौवा । ओहो काजल, अबै अबै, ह्विल चेयर लग कुर्सी छौँ तानिकऽ बैस। कि कहियौँ बौँवा एखन हम बिलकुल ठिक छी। लेकिन ई करौना सँ त हमरा बहुत परेसान कदेने छल । कहियो देह दुखाई, कहियो खोखी लागिजाई, बोखार जखन तखन एनाई, साँस फेरमे दिक्कत भजाई, कथि कथि सब हुवे से नई जाइन।

महिला ःनमस्कार भैया कि समाचार अई आहाके
पुरुष ःखुश रह बौवा । ओहो काजल, अबै अबै, ह्विल चेयर लग कुर्सी छौँ तानिकऽ बैस। कि कहियौँ बौँवा एखन हम बिलकुल ठिक छी। लेकिन ई करौना सँ त हमरा बहुत परेसान कदेने छल । कहियो देह दुखाई, कहियो खोखी लागिजाई, बोखार जखन तखन एनाई, साँस फेरमे दिक्कत भजाई, कथि कथि सब हुवे से नई जाइन।
महिला ःए एखन अवस्थामे अपन देखरेख केनाक केलियै ?अच्छा आहाँके शौचालयमे ह्विलचेयर मज्जा सँ जासकैए । तए बहुत मदत भेल हएत नै ।
पुरुष ःह् दोसर सँ अलग रहके समयमे सजिलो संचनाके महत्व बहुत निक लागल हमरा
महिला ःआई ।
पुरुष ःह। लेकिन हम घरेमे रहली, अस्पताल नै जाइपरल । हावा आवत जावत होबबला कोठामे रहैछली । हमर बेटी बेरबेर बोखार आ अक्सिजनके मात्रा नापि दै । आ कोनो सल्लाह लेबके रहैछल त १११५ मे फोन कऽकऽ ललैछलि । आ हमरा स्याहार केलाके बादमे हमरबेटी माक्स लगाके बे्रबेर साबुन पानी सँ मैलमैलक हात धोइछलै ।
महिला ःआहाके बेटी त बहुत निक काम केलक
पुरुष ःह सेत केलक । लेकिन साँस लेबमे दिक्कत हुवे, छाती बहुते दुखाई, आ चलबाजमे कनिको कमजोरी महसुश होई त अस्पताल लजाईपरै है । अस्पतालके व्यवस्थापनके लेल ११३३मे सम्पर्क करपरै है ।
महिला ःए कोरोना सँ जितकेलागि बहुत बात सबपर ध्यान देव परैहै नई ।
पूरुष ःह। आ एगो बात बुझल अई कहियोकाल मोन नै लागै त हमर बेटी दोसर कोठामे गीत बजा दै । उहे गीत सुनिक मन बहलबै छली ।
महिलाः लिय त आहाके अनुभव सँ हम बहुत बात सिखलौ ।
पुरुषः ह संरचना सब त आउर विभिन्न किसिमके अपाङगता भेल व्यक्ति ज्येष्ठ नागरिक, बालबालिका, गर्भबती महिला सबके सोचिक बनाब परतै ।
महिला ः देखियौँ आदमीके अपन देखरेख अपने करके लेल कतेक सहयोग भेलै
पुरुष :ए एखन अवस्थामे अपन देखरेख केनाक केलियै ?अच्छा आहाँके शौचालयमे ह्विलचेयर मज्जा सँ जासकैए । तए बहुत मदत भेल हएत नै ।

पुरुष ःह् दोसर सँ अलग रहके समयमे सजिलो संचनाके महत्व बहुत निक लागल हमरा
महिला ःआई ।

पुरुष ःह। लेकिन हम घरेमे रहली, अस्पताल नै जाइपरल । हावा आवत जावत होबबला कोठामे रहैछली । हमर बेटी बेरबेर बोखार आ अक्सिजनके मात्रा नापि दै । आ कोनो सल्लाह लेबके रहैछल त १११५ मे फोन कऽकऽ ललैछलि । आ हमरा स्याहार केलाके बादमे हमरबेटी माक्स लगाके बे्रबेर साबुन पानी सँ मैलमैलक हात धोइछलै ।

महिला ःआहाके बेटी त बहुत निक काम केलक

पुरुष ःह सेत केलक । लेकिन साँस लेबमे दिक्कत हुवे, छाती बहुते दुखाई, आ चलबाजमे कनिको कमजोरी महसुश होई त अस्पताल लजाईपरै है । अस्पतालके व्यवस्थापनके लेल ११३३मे सम्पर्क करपरै है ।

महिला ःए कोरोना सँ जितकेलागि बहुत बात सबपर ध्यान देव परैहै नई ।

पूरुष ःह। आ एगो बात बुझल अई कहियोकाल मोन नै लागै त हमर बेटी दोसर कोठामे गीत बजा दै । उहे गीत सुनिक मन बहलबै छली ।

महिलाः लिय त आहाके अनुभव सँ हम बहुत बात सिखलौ ।

पुरुषः ह संरचना सब त आउर विभिन्न किसिमके अपाङगता भेल व्यक्ति ज्येष्ठ नागरिक, बालबालिका, गर्भबती महिला सबके सोचिक बनाब परतै ।

महिला ः देखियौँ आदमीके अपन देखरेख अपने करके लेल कतेक सहयोग भेलै

सीबिएमके साझेदारीमे नेपाल सरकार स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मंत्रालय, राष्ट्रिय स्वास्थ्य शिक्षा सुचना तथा संचार केन्द्र एवम् राष्ट्रिय अपांग महासंघ नेपालद्वारा जनहितमे जारी!